Monday, February 1, 2010

प्रोफ़ेसर क़ासमी को साहित्य अकादमी सम्मान : आग़ाज़ की शेरी-नशिस्त

ऊर्दू के विश्वसनीय आलोचक और मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू प्रोफ़ेसर अबुल कलाम क़ासमी को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2009 के लिए चुने जाने पर आग़ाज़ साहित्यिक अंजुमन ने जिसके संरक्षक प्रो0 ज़ैदी जाफ़र रज़ा हैं, एक काव्य-गोष्ठी का आयोजन उनके आवास [एलीज़ा, अहमद नगर] पर किया। प्रो0 क़ासमी को यह पुरस्कार उनकी पुस्तक म'आसिर तन्क़ीदी रवैये पर दिया गया है।इस से पूर्व उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिमी बगाल की उर्दू अकादमियाँ उन्हें पुरस्कृत कर चुकी हैं।इस वर्ष हिन्दी का साहित्य अकादमी पुरस्कार कैलाश वाजपेयी को उनके काव्य-संग्रह 'हवा में हस्ताक्षर' पर दिये जाने का निश्चय हुआ है। प्रो0 क़ासमी की आलोचना भारत और पाकिस्तान में पर्याप्त सम्मानित दृष्टि से देखी जाती है।'तख़लीक़ी तजरबा', मशरिक़ी शेरियात और उर्दू तनक़ीद की रिवायत',और शायरी की तन्क़ीद उनकी अन्य आलोचना पुस्तकें हैं। आग़ाज़ ने प्रो0 क़ासमी को बधाई देते हुए अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाधयक्ष प्रो0 ख़ुरशीद अहमद की अधयक्षता में शेरी- नशिस्त का प्रारभ किया।प्रो0 ज़ैदी ने प्रो0 क़ासमी को विशेष बधायी दी और कहा कि उर्दू एक भाषा से कहीं अधिक एक विकासोन्नत प्रगतिशील तहज़ीब है जिसके वक्ष मे हज़ारों वर्ष की भारत ईरानी विरासत है। गंगा-जमुनी तहज़ीब उर्दू के अतिरिक्त भारत की किसी भाषा में नहीं है। कव्य गोष्ठी में जिन कवियों की रचनाएं विशेष पसन्द की गयीं उनमें ज़ैदी जाफ़र रज़ा, महताब हैदर नक़वी, राशिद अनवर राशिद और शकेब की ग़ज़लें विशेष पसन्द की गयीं। प्रस्तुति : डा0 पर्वेज़ फ़ातिमा

1 comment:

"अर्श" said...

जनाब क़ासमी साब को इस मौके के लिए ढेरो बधाईयाँ और मुबारकवाद ...
उनसे कभी मिला नहीं ... और श्रीमान वाजपयी जी को भी साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए ढेरो बधाईयाँ इनसे तो मुखातिब हो चुकाहूँ ... आभार आपका


अर्श