Sunday, April 19, 2009

मन के नीरव कुञ्ज में वंशी की मीठी तान पर.

मन के नीरव कुञ्ज में वंशी की मीठी तान पर.
गोपियों के नृत्य की अनुपम छटा है शान पर. .

इन कदम्बों के ये कुसुमित पुष्प गहरे हैं बहोत,
कुछ चकित होते नहीं ये प्यार के अनुदान पर.

देख कर चंचल नयन की भाव भीनी भावना,
हो गयीं राधा समर्पित कृष्न की मुस्कान पर.

अब नहीं आता कभी मन में किसी का भी विचार,
दृष्टि केन्द्रित हो चुकी है अब उसी के ध्यान पर.

हम गली-कूचों में गोकुल के उसे देखा किये,
हमने पायी उसकी महिमा आज भी पर्वान पर.

दी थी जमुना की रुपहली रेत ने चेतावनी,
देखो पग रखना संभल कर प्रेम के सोपान पर.
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1 comment:

गौतम राजऋषि said...

चमत्कृत हूं सर हिंदी और उर्दू- दोनों पर आपकी जबरदस्त पकड़ पर...
जमुना के रूपहली रेत की अनूठी चेतावनी ने मन मोह लिया